खुदा का चैलेंज पूरी मानव-जाति को #1-7


लगभग चौदह सौ साल से अल्‍लाह ने कुरआन में मानव जाति को बहुत से चैलेंज किये हुये हैं जिनका हमें क्‍यामत तक इन्‍तजार है।

जैसे कि यह समझें 
कुरआन में अरबी भाषा में 114 सूरतों(अध्‍याय) में से किसी 1 जैसी सूरत, दोबारा ध्‍यान से पढें 114 सूरतें अर्थात नमूनों में से किसी एक जैसी बनाकर या दूसरों की मदद से भी बनवाकर दिखादो का चैलेंज मिलता है,
सूरत को यूं समझें 
कुरआन 114 हिस्सों में बंटा हुआ है, हर हिस्से को सुरः कहते हैं, सूरत ऐसी हैं जो अक्षरों-शब्दों का सार्थक क्रम के साथ जोडकर बनी होती हैं। यह इतनी छोटी भी है कि उसमें दो तीन छोटे-छोटे वाक्यों और चोदह-पन्द्रह शब्दों से अधिक नहीं, मगर छोटी सूरतों के संक्षिप्त होने का कदापि यह अर्थ नहीं कि उसमें वर्णित तत्व भी थोडा है। बडी सूरतों में सत्य-ज्योति की जो किरणें एक विशाल क्षेत्र तक फैली हुई हैं, वही छोटी सूरतों में एक छोटे से क्षेत्र के भीतर सिमट गइ हैं। इन सूरतों की हैसियत ‘सारगर्भित सूक्तियों की-सी है। सबसे छोटी सूरतों में से एक – ध्‍यान दें इस सूरत में केवल 10 शब्‍द हैं sample

कुरआन में खुदा कहता हैः
”कोई शक हो तो इस जैसी कोई एक सूरः बना लाओ और इस उददेश्य के लिए अल्लाह को छोडकर अपने सारे प्रतिनिधियों को भी बुला लो, अगर तुम अपने विचार में सच्चे हो” –सुरः बक़र: 2:23

And if you are in doubt about what We have sent down upon Our Servant [Muhammad], then produce a surah the like thereof and call upon your witnesses other than Allah, if you should be truthful. (quran 2:23)

अर्थात तुम सब मिलकर और जिस किसी को भी अपनी मदद के लिए बुलाना चाहो, बुला कर कोशिश कर डालो, यहां तक कि पूरी मानव-जाति को इस काम के लिए इकट्ठा कर लेने की तुम्हें पूरी छूट है। अगर तुमने इस तरह के इस चैलेंज का सफल उत्‍तर दे दिया, तो कुरआन का इन्सानी कलाम होना मान लिया जाएगा इसे  ‘कलामे इलाही’ कहते हैं,, आपके लिए बहुत आसान चुनोती है इसे इन्‍सानी साबित करने के लिए।
यह चुनौती आज भी अपनी जगह इसी तरह मौजूद है। सारे विद्वान मिल जाओ और बनादो 114 सूरतों जैसी में से किस‍ि 1 जैसी बनाकर दिखादो विश्‍वास किजिए जो कुरआन की यह चुनौती कबूल करलेगा बडा नाम होगा उसका और उसकी दुनिया दोनों तरह बन जाएगी सूरत बनादी तो सारी इस्‍लामी दुनिया की हार होगी,,, न बना सका तो वो जान जाएगा कि यही हक है,, यही सच है।
इस पर खामखा के प्रयत्न से कई बडे विश्‍व प्रसिद्ध विद्वान हंसी का पात्र बन चुके हैं, सारी अरबी दुनिया के ज्ञानी ध्‍यानी उसके आगे सर झुका रहे हैं कि वाकई हम इसकी चुनौती का जवाब नहीं दे सकते
विचार करो, भागो मत, इकटठा करो सारी दुनिया के अरबी जानकारों को,,, नहीं हैं है तो पैदा करो, इस्‍लाम पर वार करने वालों तुम इन चैलेंजों से क्‍यूं भागते हो? भागकर अपना ही नुक्‍सान कर रहे हो,
प्रयत्न करो खुली चुनौती
विचार करो,
फिर स्‍वीकार करो अब भी समय है मान लो केवल अल्‍लाह सच है
इस बात को विस्‍तार से मगर इंग्लिश में समझने के लिए इधर पढें
More En English
 http://quran-challanges.blogspot.com/2011/05/challange-in-quran-bring-surah-similar.html

अनुवादि‍त कुरआन, पारिभाष‍ि‍क शब्‍दावली एवं विषय सहित
http://www.quranhindi.com/

हिन्‍दी युनिकोड सहित अनेक भाषाओं में क़ुरआन
http://tanzil.net/#trans/en.hilali/2:23

………………………..…………….…………….…………….…………….…………….
ऐसे दूसरे चैंलेंज

अल्‍लाह का चैलेंजः कुरआन में विरोधाभास नहीं
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2 thoughts on “खुदा का चैलेंज पूरी मानव-जाति को #1-7

  1. Anonymous

    pyare ajnabi duniya ka har chotha insan musalman,,,ek bhi virodhbhas sabit karwa do saari duniya mil jao,,,to,,,ekk bhi musalmaan nahin milega….dekh lo kitna asan challange he….6666 ayten aur ek men kami sabit karna he bas..

    Reply
  2. Mohammed Umar Kairanvi

    @ imran भाई यह कुरआन में विरोधाभास नहीं है आप जो बता रहे हो वह अनुवाद में विरोध का आभास मात्र है, एक भी विरोध कोई साबित करदे तो दुनिया में एक भी मुसलमान नहीं मिलेगा,

    signature:
    आओ विचार करें कि मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध मैत्रे, अंतिम ऋषि
    (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा? हैं या यह big Game against Islam है?
    antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog) डायरेक्‍ट लिंक

    अल्‍लाह का
    चैलेंज पूरी मानव-जाति को

    अल्‍लाह का
    चैलेंज है कि कुरआन में कोई रद्दोबदल नहीं कर सकता

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