जन सेवा और इस्लाम jan-sewa-social-service-islam

इस्लाम का जन-सेवा से संबन्धित दावा है कि वह सम्पूर्ण मानव जाति और समस्त समाज के सारे मामलों में भरपूर रहनुमाई करता है, सिद्धांत देता है, सुनिश्चित नियम भी रखता है और नैतिक व भौतिक, हर स्तर पर समस्याओं का निवारण करता और जटिलताओं को सुलझाता है। उसका यह दावा, अपने पास निरी दार्शनिकता (Indialism) ही नहीं रखता, बल्कि व्यावहारिक स्थलों में अपने साथ मजबूत दलील व सबूत की शक्ति भी रखता है। मानव-अधिकार व कर्तव्य का एक सन्तुलित प्रावधान इस्लाम की बेमिसाल विशेषता है। मुसलिम समाज की बहुत-सी त्रुटियों, कमजोरियों और कोताहियों के बावजूद, उसपर इस्लाम की इस विशेषता का रंग सदा ही छाया रहा है। इतिहास भी इसका साक्षी रहा है और वर्तमान युग में समाजों का तुलनात्मक व निष्पक्ष अवलोकन भी इस बातत की गवाही देता है।
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विषय सूची
दो शब्द, भूमिका,

विषय का परिचयः
सेवा एक नैसर्गिक भावना है
बच्चे की सहज प्रकृति
प्रकृति से विचलन का आरंभ होता है
इस्लाम की सुधारवादी भूमिका
अल्लाह से सम्बन्ध सेवा की भावना को सुदृढ करता है
अल्लाह के नेक बन्दे निस्सवार्थ सेवा करते हैं
सेवा के लिए भावनाओं की पवित्रता आवश्यक है
सत्ता सेवा के लिए है
सेवा में जोर-जबरदस्ती न हो
सेवा सम्मान दिलाती है

इस्लाम और मानव-जाति की सेवाः

पैगम्बरों की शिक्षा में जनसेवा
कुरआन और जनसेवा
अल्लाह के अनुग्रह के प्रति आभार
अल्लाह के बन्दों की सेवा अल्लाह की सेवा है
हर दशा में सेवा की भावना हो

सेवा भी इबादत हैः
नमाज और जकात का सम्बन्ध
रोजा का फिदया (अर्थदण्ड)
रोजा और सदक-ए-फित्र
हज में जब फिदया अनिवार्य (वाजिब) होता है
जिहार से रूजू का तरीका
सौगंध का प्रायश्चित (कसम का कफफारा)

सेवा सबकी की जाएः
स्वार्थी लोग
परिवारजनों के दास
समुदाय की (उम्मत) सेवा
उम्मत की कल्पना से राष्टीयता (कौमियत) की भावना नहीं उभरती
संपूर्ण मानजाति की सेवा

सेवा और अच्छे व्यवहार के अधिकारी ये हैं :
मां-बाप के साथ अच्छा व्यवहार
नानेदारों के साथ अच्छा व्यवहार
अनाथों (यतीमों) के साथ अच्छा व्वयवहार
मुहताजों के साथ अच्छा व्यवहार
गुलामों और आश्रितों के साथ अच्छा व्यवहार
नैतिक शिक्षा के साथ कानूनी सुरक्ष भी

जनसेवा के विभिन्न कामः
धन के द्वारा सेवा
ईमावालों के धन में वंचितों (महरूमों) का हक है
सद्व्यवहार
सेवा के कुछ अन्य तरीके
प्रत्येक सेवा दान (सदका) है
सामायिक सेवा का महत्व एवं श्रेष्ठता
खाना खिलाना
खाना खिलाने में सहयोग
पानी पिलाना
खाने की तैयारी में आंशिक सहायता करना
कपडे उपलब्ध कराना
मांगने वाले का हक पहचानना
बीमार से मुलाकात और सेवा करना

कठिनाइयों के स्थायी समाधान की आवश्यकताः
मुहताजों और विधवाओं की सेवा की व्यापक धारणा
अनाथ के भरण-पोषण का सही अर्थ
व्यवसाय एवं काम में लगाने की प्रेरणा
उद्योग व्यवसाय में सहयोग का महत्व

सेवा के कुछ निर्धारित कामः

आर्थिक सहयोग
कर्ज के द्वारा हायता करना
आवश्यक वस्तु तोहफे में देना
कोई चीज उधार देना
एक ही प्रकार की दो चीजें देना
कारोबार में साझेदारी
खेती-बाडी में साझेदार बनाना
मशविरा देना
पीडित की सहायता करना

जनकल्याण सम्बन्धी सेवाएं-
पवित्रता एवं स्वच्छता की शिक्षा एवं व्यवस्था
मार्ग से कष्ट दूर करना
सराय एवं होटल का निर्माण करना
पानी की व्यवस्था
जमीन का आबाद करना
वृक्षारोपण
मसजिदों की स्थापना
जनहित के कामों के लिए धर्मार्थदान(वक्फ) की श्रेष्ठता
सार्वजननिक सम्पति को हानि न पहुंचाई जाए
वे जीवन साधन जो सार्वजनिक सम्पति हैं
कौमी महत्व के साधन सबके लिए हैं
निजी जीवन-साधनों में भी अन्य लोगों का हक है

जन कल्याण की संस्थाएं एवं संगठनः

संस्थाओं की आवश्यकता एवं महत्व
संगठित प्रयास के लाभ
गैरमुस्लिमों से सहयोग
राज्य से सहयोग

गलत विचारों का सुधारः
इन्सान पर विभिन्न अधिकार लागू होते हैं
अधिकारों में एक स्वाभाविक क्रम है
नातेदारों का हक प्रमुख है
मुहताजों के अधिकार की उपेक्षा न हो
धनी और निर्धन का स्थाई विभाजन नहीं है
निजी और सामाजिक आवश्यकताओं के लिए सहायता मांगी जा सकती है
जनसेवा पूरा दीन (धर्म) नहीं है

निस्सवार्थता (इखलास) अनिवार्य है

निस्सवार्थ खर्च करने का प्रतिदान
पाखण्ड से प्रतिदान(अज्र) और पुण्य (सवाब) नष्ट हो जाता है
ख्याति के लिए सेवा
ख्चाति के लिए जनसेवा का परिणाम
निस्सवार्थ जनसेवा का असीम प्रतिदान
एहसान जताकर सवाब नष्ट न किया जाए
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4 thoughts on “जन सेवा और इस्लाम jan-sewa-social-service-islam

  1. Anonymous

    इस्लाम पर जनसेवा से संबन्धित इतनी जानकारियं बहुत खूब,सब धर्म के भाइयों को आगे आकर बताना चाहिये कि उनका धर्म, जनसेवा बारे में किया कहता है, इससे जनसेवा को बढावा मिलेगा, जनता यह जानेगी कि जनसेवा केवल बिना पानी की पियाउ लगाने तक ही नहीं है, और बहुत कुछ भी है इसके सिवा, बधाई बाद में दूंगा पहले देखते हैं मेरे भाई किया कहते हैं

    Reply
  2. MY MBA EXPERIENCE

    aap ne logon ko jansewa ke sambandh me jo jankari di usse bohat tabiat khush hui………..kyonki ye islam ka ek bohat bada juj he…..
    jese ki ek hadis(rasul mohd ka farman) me aaya he ki tum me sabse behtreen shaksh(insan) voh he jo logo ko sabse jyada nafa(jansewa)pahunchaye………………
    to isse pata chalta he ki tum ko subse achcha musalman hone ke liye sabse jyada jansewa karni hogi

    Reply
  3. प्रशांत गुप्ता

    मोहम्मद साहब , मेरे ब्लॉग पर टिपण्णी करने के लिये धन्यवाद पर
    ये अंडे डंडे की फोटो नहीं विचारो के स्तर की फोटोज है , अवतार ओर अन्य धार्मिक मान्यताओ पर चर्चा आप को मुबारक , हम अपनी धार्मिक मान्यताओ को दिल से मानते है ओर दूसरो की मान्यताओ को स्वीकार करते है ये विवाद का विषय नहीं है , पर आप तय करे की आप शिवाजी के साथ है या अफजल रुपी आक्रान्ता के साथ , हमारी धार्मिक मान्यताये अलग है पर परम्परा – इतिहास ओर पूर्वज तो एक ही है , फिर आज जब अफजल जैसे आक्रान्ता के समर्थन मे कुछ लोग आतंक फैला रहे है ओर दूसरे समुदाय की धार्मिक रीतिरिवाजों पर चोट कर कर रहे है तो आप जैसे लोगों को उन का विरोध करना चाहिये न की अन्य मुद्दों से उसे टालना या उस का समर्थन नहीं करना चाहिये

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