विभिन्‍न प्रकार की नमाज और उन्हें पढने का तरीका namaz [ namaj ] ka tariqa

लाखों हिन्‍दी जानने वाले हमारे भाईयों-बहनों को अरबी न समझने के कारण नमाज़ पढने में दिक्‍कत होती है, उनकी परेशानी को देखते हुये, पेश है ऐसी किताब जो नमाज विषय पर हिन्‍दी में सभी जानकारी देती है,

पाँचों नमाजों सहित ईद, जनाजे और जुमे जैसी सब नमाजें सीखने के लिए, और सभी के जानने के लिए कि इनमें क्‍या पढा जाता है, अरबी आयतों को हिन्‍दी में पढकर सीखा भी जा सकता है, namaz ke tarika सिखाने वाली लाजवाब किताब आनलाइन , one page designnamaj ka tareeka
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डाउनलोडिंग में आसानी के लिए इधर तीन अलग अलग तरह की किताबें june 2014 में अपलोड की हैं,,,
डाउनलोड न कर पायें तो books इमेल से मंगा सकते हैं
 umarkairanvi@gmail.com

निंस्‍सन्‍देह नमाज बुराई  व बेहयाई से बचाती है

(1)—-तर्कीबे नमाज और छ कलिमे page 103 kalimas
http://www.mediafire.com/view/anys7nr30i816ee/namaz-and-six-kalima-book-hindi.pdf

 (2)—-पुस्‍तक ”मेरी नमाज”  sath men Eid , Janaze wagera ki namaz
http://www.mediafire.com/view/ell8cd5plg9srd9/Namaz-Ka-Tariqa-Tarika-meri-Namaj-Hindi.pdf

 पाँचों नमाजों सहित ईद, जनाजे और जुमे जैसी सब नमाजें सीखने के लिए, और सभी के  जानने के लिए कि इनमें क्‍या पढा जाता है, अरबी आयतों को हिन्‍दी में पढकर  सीखा भी जा सकता है, namaz ke tariqa सीखाने वाली लाजवाब किताब,
(3)—-नमाज से मुताल्लिक नसीम ग़ाजी साहब की अच्‍छी किताब ‘नमाज’ –page 31 Maheelaon ke liye bhi hidayat
 
नमाज़ डाक्‍टर असलम कासमी साहब के शब्‍दों में
namaz हर मनुष्य चाहे वह कहीं भी और किसी भी स्थिति मे हो रात और दिन में पाँच बार ईश्वर के सामने एक विशेष क्रिया कलाप है जिसमें केवल चन्द मिनट लगते हैं, यह जान और समझ कर करना है कि ईश्वर उसे देख रहा है और वह ईश्वर को। जब कोई मनुष्य रात दिन में पाँच बार ईश्वर के सामने इस यक़ीन के साथ खड़ा होता है कि मरने के बाद एक दिन उसे ईश्वर की अदालत में अपने हर अच्छे बुरे कार्य का हिसाब देना है जिसके बदले उसे या तो अनन्त तक के लिए स्वर्ग का आराम मिलेगा या नरक की यातनाएं, तो फिर वह अपने जीवन में अच्छे कार्य करता है और बुरों से बचता है, पाँच समय के अभ्यास से उसके के हृदय में ईश्वरीय सत्ता स्थापित हो जाती है, फिर वह चोरी नही करता, किसी का ना हक़ खून नही बहाता, किसी का हक़ नही मारता, किसी को बुरी नज़र से नही देखता, केवल इसलिए ही नही कि यह कार्य करने से उसे जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ सकता है बल्कि इसलिए भी कि वह दुनियावी अदालत की नज़र से तो बच सकता है परन्तु उस ईश्वर की नज़र से नही बच सकता जो हर समय और हर जगह है। अब अगर वह एक अधिकारी है तो रिश्वत नही लेगा केवल इसलिए नही कि उसे अपने से ऊपर के आफिसर का भय है जिसकी वह पकड़ में भी आ सकता है और बच भी सकता है, बल्कि इसलिए कि उसे ईश्वर की पकड़ का यक़ीन है। अब अगर वह एक कर्मचारी है तो उपने कर्तव्य और समय का पालन अधिकारी के डर से नही बल्कि ईश्वरीय डर से करता है, अर्थात् कोई उसे देख रहा हो या न देख रहा है, वह बुराई से बचता है और अच्छे कार्य करता है क्योंकि वह जहाँ भी है ईश्वर उसे देख रहा है जो उसके द्वारा किए कार्यो का हिसाब लेगा।
और अगर कोई नमाज़ पढ़ने के बावजूद भी बुराइयों से नही रूकता तो समझिए कि वह नमाज़ नही पढ़ रहा है केवल औपचारिकता निभा रहा है। क़ुरआन में हैः
नमाज बुराइयों और बे हयाई की बातों से रोकती है। सूरह अनकबूत आयत 45
नमाजफारसी शब्द है, जो उर्दू में अरबी शब्द सलात का पर्याय है। कुरान शरीफ में सलात शब्द बार-बार आया है और प्रत्येक मुसलमान स्त्री और पुरुष को नमाज पढ़ने का आदेश ताकीद के साथ दिया गया है। इस्लाम के आरंभकाल से ही नमाज की प्रथा और उसे पढ़ने का आदेश है। यह मुसलमानों का बहुत बड़ा कर्तव्य है और इसे नियमपूर्वक पढ़ना पुण्य तथा त्याग देना पाप है। more

नमाज – विकिपीडिया

 

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Namaz (salat) in English (Step by Step)

 

19 thoughts on “विभिन्‍न प्रकार की नमाज और उन्हें पढने का तरीका namaz [ namaj ] ka tariqa

  1. Mohammed Umar Kairanvi

    @ अजनबी -यह जरूरत तो मैंने पूरी कर रखी थी, आपको खबर न हो सकी , उधर यह बुक 945 बार पढी जाचुकी, इस वेब की तरफ से कहा गया था

    umarkairanvi's Document:has made it into the Scribd hotlist. Congratulations!
    Reads:950
    Downloads:224

    Reply
  2. Mohammed Umar Kairanvi

    तकनीकी कारणों या स्‍टाफ की लापरवाई से हुई चुक को इतनी जल्‍द ठीक कर देने पर ब्‍लागवाणी का बेहद शुक्रिया

    Reply
  3. Anonymous

    commnets no. (2) men 945 भी लिखा है और 950 भी ठीक गिनती क्या है

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  4. Aslam Qasmi

    उमर भाई, इस पुस्‍तक की नेट मैं बहुत जरूरत थी, चारों तरफ गुनहगारी, भ्रष्‍टाचार, अत्‍याचार हो रहा है, इस से कुछ भाई नमाज में अल्‍लाह से दुनिया में शान्ति की दुआ कर सकेंगे, जज़ाकल्‍लाह

    Reply
  5. DR. ANWER JAMAL

    namaj
    do shabdon ka yog hai nam + aj = namaj
    ajanme ishwar ko naman karna .
    muslims ke saath hinduon ko bhi namaj padhna chahiyye .
    pehle ye log namaj hi padhte the .
    yag ka adambar baad men shuru hua .

    Reply
  6. Mohammed Umar Kairanvi

    @गुरू अनवर जी पहले हिन्‍दू भाई नमाज पढते थे, हैरत की बात है, कभी इस पर पोस्‍ट बनाईये, आपसी भाई चारा बढेगा, दोनों मिलके नमाज पढा करेंगे, ईश्‍वर से शांति की दुआयें किया करेंगे

    Reply
  7. nikhil

    करानवी मियां तुम्‍हार कथित गुरू से कुछ सवाल उनके ब्‍लाग पर किये हैं उत्‍तर दिलवाओ

    Reply
  8. दीपक 'मशाल'

    Jankari ke liye aabhar.. Jume ke roze rakhte waqt maine bhi namaz ata ki hain.. kash Hindustaan me wo din aaye jab muslim bhai vajoo banayen aur hindoo bhai unke hathon par paani dalen.. muslim bhai chandan ghisen jise hindoo apne mathe par lagayen..

    Reply
  9. DR. ANWER JAMAL

    @Kairanvi bhai
    apki ichha ka samman zuroor kiya jayega.
    hindu bhaiyon ke purane mandiron ka munh bhi masjid ki tarah kaba ki taraf hota hai . Aapko ye baat khud bhi janni chahiyye aur sabko batani bhi chtahiyye .

    Reply
  10. झंडागाडू

    डाक्टर अनवर साहब जरूर इस बात पर एक किताब लिखए
    अगर हो सके तो मुझे टाइपिंग के लिए खिदमत का मोका दिज्येगा

    Reply

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